नई दिल्ली – आज की वैश्विक राजनीति में जो दिखता है, जरूरी नहीं कि वही हकीकत हो। भारत और पाकिस्तान के बीच की बढ़ती तनातनी केवल क्षेत्रीय मसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियों का बड़ा गेम चल रहा है।
हथियारों की मंडी में छिपा खेल
2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान ने अपने 80% हथियार चीन से खरीदे। इससे साफ है कि पाकिस्तान की मिलिट्री डिपेंडेंसी पूरी तरह चीन पर बढ़ रही है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के हथियारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं क्योंकि इनका इस्तेमाल अब तक किसी बड़े युद्ध में नहीं हुआ है। ऐसे में चीन चाहता है कि कोई ऐसा क्षेत्रीय संघर्ष हो जिसमें उसके हथियारों की ताकत साबित हो जाए – लेकिन वो खुद सीधे युद्ध में कूदना नहीं चाहता।
भारत-पाकिस्तान जल विवाद बन सकता है बहाना?
हाल ही में भारत ने सलाल और बगलिहार डैम्स से पानी के फ्लो पर कुछ सीमाएं लगाई हैं। पाकिस्तान इसे ‘युद्ध की कार्यवाही’ मान रहा है। हालांकि, भारत अब भी इंडस वाटर ट्रीटी के दायरे में ही है। इसके बावजूद अगर विवाद बढ़ा, तो एक नया मोर्चा खुल सकता है – जो सिर्फ दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहेगा।
अमेरिका: दोनों के साथ या किसी एक के?
अमेरिका एक ओर पाकिस्तान को हथियार और फंडिंग देता है, दूसरी ओर भारत को ‘स्ट्रेटेजिक पार्टनर’ मानता है। फरवरी 2025 में भारत और अमेरिका के बीच सैन्य और टेक्नोलॉजी से जुड़ा बड़ा समझौता भी हुआ है। अमेरिका भारत को इंडो-पैसिफिक स्ट्रैटेजी का केंद्र मानता है ताकि वह चीन को बैलेंस कर सके।
चीन की चिंता और जवाबी रणनीति
चीन को लगता है कि भारत-अमेरिका की बढ़ती नजदीकी उसके लिए खतरा है। जब अमेरिका ने टैरिफ वॉर शुरू किया, तो चीन ने यूरोपीय यूनियन को साथ लेने की कोशिश की ताकि वह अमेरिका के खिलाफ एक वैश्विक फ्रंट बना सके। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने भी इस पर कड़ा जवाब देते हुए कहा कि यह दबाव की रणनीति है ताकि अमेरिका की घरेलू अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा किया जा सके।
निष्कर्ष
भारत-पाकिस्तान की लड़ाई केवल दो देशों के बीच नहीं है – यह एक बड़ा ग्लोबल पावर गेम है जिसमें अमेरिका और चीन अपने-अपने हित साधने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले समय में यदि कोई संघर्ष होता है, तो उसका असर सिर्फ एशिया नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा।













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