पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के हालिया बयान ने न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल मचा दी है। उन्होंने विदेशों में बसे पाकिस्तानी नागरिकों को संबोधित करते हुए भारत और हिंदुओं के खिलाफ ऐसा भाषण दिया, जो एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुकूल नहीं कहा जा सकता।
क्या कहा पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने?
जनरल मुनीर ने एक कार्यक्रम में कहा कि:
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पाकिस्तान की स्थापना मदीना की तर्ज पर एक इस्लामी राष्ट्र के रूप में हुई थी।
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हिंदू और मुसलमान हर मायने में अलग हैं — संस्कृति, धर्म और विश्वास में।
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पाकिस्तान को गर्व होना चाहिए कि वह भारत से अलग एक इस्लामिक देश के रूप में बना।
यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक स्टैंड नहीं था, बल्कि उसमें हिंदुओं के प्रति हिंदूफोबिक सोच भी झलक रही थी। जनरल मुनीर ने जिस प्रकार से “हम उनसे बिल्कुल अलग हैं” कहकर धार्मिक नफरत को हवा दी, उसे भारत ने गंभीरता से लिया।
भारत का स्पष्ट और सख्त संदेश
भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी करते हुए कहा:
“तुम कुछ भी बोलो, हमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) वापस चाहिए। बाकी बातें अपनी जगह, लेकिन PoK को खाली करना ही होगा।”
यह बयान स्पष्ट करता है कि भारत अब सिर्फ बातचीत के मोड में नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को लेकर उसका रुख पहले से अधिक ठोस हो चुका है।
🔍 सेना प्रमुख का बयान क्यों है अहम?
पाकिस्तान में सत्ता का असली केंद्र अक्सर सेना ही होती है। इस लिहाज से सेना प्रमुख का बयान किसी भी औपचारिक सरकारी स्टेटमेंट से कम नहीं समझा जाता। यही वजह है कि भारत ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया दी और इसे वैश्विक मंच पर भी उजागर करने की कोशिश की।
🧠 विश्लेषण: पाकिस्तान की हताशा?
जनरल मुनीर का बयान यह दर्शाता है कि पाकिस्तान आज भी उस पुरानी सोच में फंसा है जिसमें “धर्म के आधार पर अलग राष्ट्र” का औचित्य साबित करने की कोशिश की जाती है। वहीं भारत की प्रगति, स्थिरता और वैश्विक स्वीकार्यता शायद पाकिस्तान की सेना और राजनीति दोनों को असहज कर रही है।
🔴 निष्कर्ष:
भारत ने साफ कर दिया है — “बयानबाज़ी नहीं चलेगी, PoK चाहिए।”
जनरल मुनीर जैसे बयान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि को और खराब ही करेंगे, खासकर जब दुनिया धार्मिक सद्भाव की ओर बढ़ रही है।













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