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भारत-पाक तनाव: सिंधु जल समझौते से भारत का बाहर आना, शिमला समझौता भी खतरे में?

लेखक: Global Updates टीम | www.globalupdates.in

हाल ही के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक और सामरिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। भारत सरकार की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु जल समझौते से बाहर निकलने का फैसला किया। यह कदम भारत की ओर से अब तक की सबसे साहसी रणनीतिक चालों में से एक माना जा रहा है।

पाकिस्तान का पलटवार: “एक्ट ऑफ वॉर” करार

भारत के इस कदम के बाद पाकिस्तान में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (NSC) की आपात बैठक हुई। इस बैठक में पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी मुख्य रूप से शामिल हुए और भारत के निर्णय को “युद्ध की घोषणा” बताया गया।

पाकिस्तान ने यह भी चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो वह शिमला समझौते से भी पीछे हटने पर विचार कर सकता है।

शिमला समझौता क्यों है महत्वपूर्ण?

1972 में हुए शिमला समझौते ने भारत-पाक युद्ध के बाद शांति की नींव रखी थी। यदि पाकिस्तान इससे हटता है, तो यह दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों में बड़ी दरार पैदा कर सकता है।

मीडिया में प्रतिक्रिया

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने रिपोर्ट किया कि भारत ने सिंधु जल समझौते को तोड़कर पाकिस्तान की 24 करोड़ जनता की जल-आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत ने यह निर्णय विश्व बैंक की मध्यस्थता के बिना एकतरफा रूप से लिया है।

भारत का बड़ा कदम: सिंधु जल समझौते से बाहर

भारत ने 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुए सिंधु जल समझौते को तोड़ने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले को लेकर पाकिस्तान में खलबली मच गई है। पाकिस्तान ने इसे एक “युद्ध की घोषणा” (Act of War) की संज्ञा दे दी है।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: कॉपी-पेस्ट रणनीति?

भारत के CCS की तरह पाकिस्तान ने भी अपनी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (NSC) की बैठक बुलाई। फर्क सिर्फ इतना रहा कि पाकिस्तान की बैठक में सैन्य अधिकारी प्रमुख भूमिका में नजर आए, जबकि भारत में यह निर्णय राजनीतिक नेतृत्व द्वारा लिए जाते हैं।

बैठक में पाकिस्तान ने यह दावा किया कि यदि भारत सिंधु जल समझौते को तोड़ता है, तो वह इसे भारत द्वारा युद्ध की शुरुआत मानता है और इसका प्रतिशोध (retaliation) लेने का अधिकार रखता है।

शिमला समझौते पर भी संकट?

पाकिस्तानी मीडिया और अधिकारियों की तरफ से यह संकेत दिए गए हैं कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो पाकिस्तान शिमला समझौते से पीछे हटने पर भी विचार कर सकता है। हालांकि विशेषज्ञ इसे एक “गीदड़ भभकी” (symbolic threat) मान रहे हैं।

निष्कर्ष

भारत का यह निर्णय सिर्फ एक कड़ा संदेश नहीं, बल्कि पाकिस्तान की पानी पर निर्भरता को ध्यान में रखते हुए एक रणनीतिक “वॉटर स्ट्राइक” माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान अपनी गीदड़ भभकियों को हकीकत में बदलता है या नहीं।

 

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