लेखक: ग्लोबल अपडेट्स टीम
तारीख: 23 मई 2025
हाल ही में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्षविराम को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संघर्षविराम में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी, बल्कि यह फैसला दोनों देशों के बीच सीधे संवाद से हुआ। दूसरी ओर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की और संघर्षविराम करवाया।
क्या कहा डॉ. एस. जयशंकर ने?
विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि पाकिस्तान की सेना ने भारतीय सेना से संपर्क साधा और संघर्षविराम की पेशकश की। इस पूरी प्रक्रिया में अमेरिका की कोई सीधी या परोक्ष भूमिका नहीं रही। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “अमेरिका उस वक्त अमेरिका में था, यह सबकुछ भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ।”
जयशंकर ने यह भी दोहराया कि भारत अपनी विदेश नीति में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता, खासकर पाकिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर।
डोनाल्ड ट्रंप का दावा: कितनी सच्चाई?
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल में कम से कम 8 बार दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाया। ट्रंप ने यहां तक कहा कि उन्होंने भारत पर व्यापार समझौतों के ज़रिए दबाव बनाया ताकि पाकिस्तान के साथ तनाव कम हो।
हालांकि, भारत सरकार की ओर से इस पर अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी, लेकिन जयशंकर का ताजा बयान इन सभी दावों का सीधा खंडन है।
राजनीतिक हलचल: कांग्रेस ने उठाए सवाल
जयशंकर के बयान के बाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, “अगर भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता बिना किसी विदेशी दबाव के हुआ था, तो प्रधानमंत्री ट्रंप के झूठे दावों पर चुप क्यों हैं?”
कांग्रेस ने यह भी मांग की कि सरकार ट्रंप के दावों पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दे।
भारत का सख्त रुख: आतंकवाद पर समझौता नहीं
जयशंकर ने पाकिस्तान को सख्त संदेश देते हुए कहा, “अगर आतंकवादी पाकिस्तान में हैं, तो हम उन्हें वहीं मारेंगे।” यह बयान भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है, जो सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ उसकी स्पष्ट नीति का हिस्सा है।
क्या था संघर्षविराम का कारण?
संघर्षविराम का प्रमुख उद्देश्य सीमा पर शांति बनाए रखना था, ताकि दोनों देशों के बीच बातचीत की गुंजाइश बनी रहे। इसके अलावा, पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक और आर्थिक स्थिति भी इस निर्णय का कारण हो सकती है।
निष्कर्ष:
विदेश मंत्री जयशंकर के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत-पाक संघर्षविराम एक संप्रभु निर्णय था, जिसमें किसी बाहरी देश, खासकर अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी। यह भारत की विदेश नीति की स्वतंत्रता और रणनीतिक मजबूती को भी दर्शाता है।













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