ट्रेड वॉर की नई ऊंचाई
दुनिया एक बार फिर आर्थिक युद्ध की चपेट में है और इस बार इसकी सुर्खियों में हैं अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। इस युद्ध का हथियार है – टैरिफ (Import Duty)। हाल ही में ट्रंप प्रशासन द्वारा 245% का आयात शुल्क (Tariff) चीन पर लगाए जाने की खबर ने वैश्विक बाजार को हिला कर रख दिया है।
क्या है 245% टैरिफ का मामला?
डोनाल्ड ट्रंप की ओर से चीन पर लगाए गए 245% के टैरिफ ने अमेरिका-चीन के बीच पहले से चल रही आर्थिक खींचतान को और तीव्र कर दिया है। इससे पहले अमेरिका 145% का टैरिफ लगा रहा था, जिसमें शामिल थे:
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125% रेसिप्रोकल टैरिफ (चीन के टैरिफ के जवाब में),
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20% फेंटेनिल पेनल्टी (चीन द्वारा अमेरिका में अवैध ड्रग फेंटेनिल भेजने के लिए)।
लेकिन अब यह आंकड़ा सीधे 245% तक पहुंच गया है, जो एक गंभीर कदम माना जा रहा है।
चीन पर इसका क्या असर पड़ेगा?
चीन अमेरिका को हर साल लगभग $450 बिलियन (लगभग 37 लाख करोड़ रुपये) का सामान एक्सपोर्ट करता है और इससे लगभग $300 बिलियन का लाभ कमाता है। ऐसे में अगर 245% टैरिफ लागू होता है, तो:
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चीन का व्यापार घाटा कई सौ अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
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हजारों चीनी कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं।
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बेरोजगारी और उत्पादन में गिरावट जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
क्या कहती है WTO की रिपोर्ट?
WTO (विश्व व्यापार संगठन) और विभिन्न आर्थिक इंडेक्स इस टैरिफ युद्ध को वैश्विक मंदी (Recession) का संकेत मान रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक:
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अगर एक्सपोर्ट का माल गोदामों में पड़ा-पड़ा खराब होने लगे, तो यह एक स्पष्ट आर्थिक संकट का सूचक होता है।
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इससे वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित होगी।
चीन क्यों नहीं झुक रहा?
चीन की रणनीति इस बात पर आधारित है कि अमेरिका की कई आवश्यक वस्तुएं चीन पर निर्भर हैं, जैसे:
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इलेक्ट्रॉनिक्स
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औद्योगिक उपकरण
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दवाइयां और रसायन
इसलिए चीन शायद यह मानता है कि अमेरिका चाहे जितना भी दबाव बनाए, आखिरकार उसे समझौता करना ही पड़ेगा।
भारत और अन्य देशों के लिए क्या है अवसर?
जहां अमेरिका और चीन आपस में उलझे हुए हैं, वहीं भारत और अन्य विकासशील देशों के लिए यह एक सुनहरा अवसर बनकर उभर सकता है। क्योंकि:
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कम टैरिफ (जैसे 10%) वाले देश अब अमेरिका के लिए बेहतर विकल्प बन सकते हैं।
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भारत अपने मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष: कौन झुकेगा, कौन टूटेगा?
ट्रंप का 245% टैरिफ चीन के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। यह सिर्फ एक आर्थिक लड़ाई नहीं, बल्कि सियासी और कूटनीतिक युद्ध भी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या चीन झुकेगा या अमेरिका को झुकना पड़ेगा।
इस शतरंज की बाज़ी में कौन सा खिलाड़ी मात खाएगा, इसका फैसला आने वाले महीनों में होगा।













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