SC/ST ACT पर Supreme Court का बड़ा फैसला | जानिए क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
12 अप्रैल 2025
नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) से जुड़ी एक अहम याचिका पर शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया। इस फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि SC/ST एक्ट का उद्देश्य सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि:
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SC/ST एक्ट को कमजोर नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह कानून ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे समुदायों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
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झूठे मुकदमों को रोकने के लिए संतुलन बनाए रखने की जरूरत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पीड़ितों को न्याय से वंचित किया जाए।
क्या था मामला?
याचिका में यह कहा गया था कि SC/ST एक्ट के तहत कई मामलों में बिना जांच के गिरफ्तारी हो जाती है, जिससे निर्दोष लोग परेशान होते हैं। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट से कानून में संशोधन या दिशा-निर्देश की मांग की गई थी।
कोर्ट की टिप्पणी:
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“अगर किसी निर्दोष के खिलाफ झूठा मामला दर्ज होता है तो यह न्याय का उल्लंघन है। लेकिन अगर कोई पीड़ित न्याय से वंचित होता है, तो यह और भी गंभीर मामला है।”
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कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासन और पुलिस को एक्ट के प्रावधानों को संवेदनशीलता के साथ लागू करना चाहिए।
फैसले के मुख्य बिंदु:
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SC/ST एक्ट को कमजोर करने का कोई इरादा नहीं।
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पुलिस और मजिस्ट्रेट को विवेक का प्रयोग करते हुए गिरफ्तारी करनी चाहिए।
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झूठे मामलों में जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई हो।
सामाजिक प्रतिक्रिया:
फैसले के बाद दलित और आदिवासी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के रुख का स्वागत किया है। वहीं, कुछ संगठनों ने यह भी कहा कि कानून के दुरुपयोग की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसलिए न्याय प्रणाली को संतुलित ढंग से काम करना होगा।
निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला SC/ST समुदाय के अधिकारों की रक्षा और न्यायिक संतुलन के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना यह है कि इस फैसले के बाद ज़मीनी स्तर पर कानून का क्रियान्वयन कितना प्रभावी होता है।













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