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क्या भारत-पाक युद्ध फिर टल गया? सरकार की रणनीति में आया बड़ा मोड़!

भारत-पाक तनाव पर विराम? सरकार की रणनीति बदली या दबाव में फैसला?

प्रकाशित: 2 मई 2025 

हाल के दिनों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति ने देशभर में चिंता और चर्चा का माहौल बना दिया था। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद ऐसा लग रहा था कि भारत जल्द ही कोई ठोस सैन्य कार्रवाई करेगा। लेकिन समय बीतने के साथ, न तो कोई हमला हुआ और न ही कोई औपचारिक बयान आया। इसके उलट, सरकार ने जातिगत जनगणना की घोषणा कर सबको चौंका दिया।

पहलगाम हमला: जनभावनाओं में उबाल

22 अप्रैल को पहलगाम में धार्मिक पहचान के आधार पर की गई निर्मम हत्या ने पूरे देश को हिला दिया। इस घटना के बाद देशवासियों को उम्मीद थी कि भारत सरकार पाकिस्तान को करारा जवाब देगी। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक, हर ओर यही सवाल था – “भारत कब कार्रवाई करेगा?”

युद्ध की प्रतीक्षा में एक देश

बीते 10 दिनों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। यहां तक कि पाकिस्तान की ओर से भी संकेत मिले कि उन्हें किसी भी पल हमले की आशंका है। लेकिन भारत सरकार ने कोई सैन्य कदम नहीं उठाया, जिससे लोगों में असमंजस फैल गया।

मोदी सरकार का यू-टर्न: युद्ध नहीं, जनगणना पहले!

इसी भावनात्मक और राष्ट्रीय एकता वाले माहौल के बीच मोदी सरकार ने सबको चौंकाते हुए युद्ध की बजाय जातिगत जनगणना (Caste Census) की घोषणा कर दी। यह वही मुद्दा है जिसका भाजपा पहले कड़ा विरोध करती रही थी।

अब सवाल उठ रहा है – क्या सरकार ने विपक्ष की मांग के सामने झुकते हुए यह कदम उठाया? या फिर यह एक सोची-समझी रणनीति थी ताकि सामाजिक न्याय के मुद्दे को प्राथमिकता दी जा सके?

सरकार का नया एजेंडा: जातिगत जनगणना

सभी को युद्ध की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने एकदम अलग रास्ता चुना। केंद्र ने जातिगत जनगणना की घोषणा की – जो कि लंबे समय से विपक्ष की मांग रही थी। अब लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या यह फैसला जन भावना के विपरीत है या एक रणनीतिक चुप्पी?

जनरल बनाम ओबीसी: नई सियासी लड़ाई?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले ही इसे 90 बनाम 10 की लड़ाई बता चुके हैं – यानी 10% सवर्णों के पास देश के 90% संसाधन हैं। अब सरकार ने भी इसी दिशा में कदम उठाते हुए जातिगत आंकड़े जुटाने का फैसला किया है। इससे देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आने की संभावना बन गई है।

सियासी समीकरण में बदलाव

जातिगत जनगणना की घोषणा से राजनीतिक विमर्श पूरी तरह बदल गया है। यह फैसला आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, खासकर ओबीसी, एससी और एसटी वर्गों के लिए। वहीं विपक्ष इसे अपनी जीत बता रहा है।

जनता की जिज्ञासा और असंतोष

इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • क्या सरकार ने युद्ध की रणनीति बदल दी है?

  • क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव इस बदलाव के पीछे है?

  • या फिर जातिगत आंकड़ों के सहारे चुनावी बढ़त बनाने की योजना है?

  • जनता के सवाल

    देशवासी अब सरकार से सवाल पूछ रहे हैं:

    • पहलगाम का बदला कब लिया जाएगा?

    • क्या सेना को भावनाओं का हथियार बना दिया गया?

    • क्या चुनावी गणित के चलते राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को टाल दिया गया?

निष्कर्ष

भारत-पाकिस्तान तनाव पर फिलहाल विराम लग चुका है, लेकिन असली कहानी इससे कहीं गहरी हो सकती है। आने वाले हफ्तों में यह साफ होगा कि सरकार की प्राथमिकता सुरक्षा है या समाजिक समीकरण।


आपका क्या मानना है? क्या सरकार ने सही फैसला लिया या जनता को गुमराह किया गया? नीचे कमेंट में अपनी राय जरूर साझा करें।

 

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