यह ब्लॉग “ऑपरेशन सिंदूर” की बारीकियों, भारत और पाकिस्तान के हालिया तनाव, और दोनों देशों के एयर डिफेंस सिस्टम के तकनीकी तथा रणनीतिक आयामों का हिंदी में विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य, पाकिस्तान की पलटवार रणनीति, भारत के S-400 त्रयुम्फ की तैनाती और क्षमताएं, पाकिस्तान के चीनी निर्मित HQ-9 सिस्टम के विवरण, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (SEAD) तकनीक, 2016 और 2019 के सर्जिकल स्ट्राइक/बलाकोट हवाई हमलों का ऐतिहासिक संदर्भ, तथा भविष्य में क्षेत्रीय सुरक्षा पर इन कार्रवाइयों का प्रभाव शामिल है।
ऑपरेशन सिंदूर: पृष्ठभूमि और उद्देश्य
“ऑपरेशन सिंदूर” को आतंकियों के खिलाफ भारत की निरंतर नीति का हिस्सा बताया जा रहा है। इस ऑपरेशन के तहत:
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1:30 AM के आस-पास भारत ने पाकिस्तान में नौ कथित आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए, पर इसे “पूरा” नहीं घोषित किया गया ताकि फ्लैक्सिबिलिटी बनी रहे (Atlantic Council, The Economic Times)।
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प्रतिक्रिया में पाकिस्तान ने आतंकियों की रक्षा के नाम पर भारतीय सैन्य अड्डों पर मिसाइल, ड्रोन और आर्टिलरी हमले शुरू किए, जिसे भारत ने विफल कर दिया (The Economic Times)।
पाकिस्तान का पलटवार
पाकिस्तान ने अपने “सिविलियनों” के सुरक्षित होने का दावा करते हुए भारत पर प्रतिशोधी कार्रवाई की:
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LOC और आंतरिक क्षेत्रों (चंडीगढ़, भटिंडा, बीकानेर) तक ड्रोन, मिसाइल एवं गोले दागे गए, जिन्हें भारत ने प्रभावी ढंग से न्यूट्रलाइज किया (The Economic Times)।
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भारत की सेना पर हमला “एक्ट ऑफ वार” था, जिस कारण भारत ने सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की (Atlantic Council)।
भारत का S-400 त्रयुम्फ: क्षमताएं और तैनाती
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भारत ने 2018 में ₹35,000 करोड़ में पांच स्क्वाड्रन S-400 त्रयुम्फ खरीदे; इनमें से तीन स्क्वाड्रन ऑपरेशनल हैं और शेष 2026 तक तैनात होंगे (mint)।
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S-400 में चार प्रकार की मिसाइलें (40N6E, 48N6, 9M96ED, 9M96E2) हैं, जिनकी रेंज 120 से 400 किमी तक और उड़ान ऊँचाई 30 किमी तक है (Bulgarian Military, The Economic Times)।
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मल्टी-AESA राडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमताओं से लैस, यह प्रणाली दुश्मन के विमान, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक व इंटरसेप्ट कर सकती है (Wikipedia)।
पाकिस्तान का HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम
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HQ-9 चीनी निर्मित दो-स्टेज सतह-से-वायु मिसाइल है, लंबाई 6.8 मीटर, कुल द्रव्यमान लगभग 2 टन, वारहेड 180 किग्रा, अधिकतम गति Mach 4.2 (Wikipedia, Army Recognition)।
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बेस वेरिएंट की रेंज 100–200 किमी है, नवीनतम वेरिएंट में इसे 300 किमी तक बढ़ाया गया है, ऊँचाई पर 30 किमी तक क्षति पहुँचाने में सक्षम (Army Technology)।
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सेमी-एक्टिव राडार होमिंग, मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग और एंटी-जैमिंग क्षमताएं इसे क्षेत्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण बनाती हैं (Business Today)।
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और SEAD तकनीक
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Suppression of Enemy Air Defenses (SEAD) का लक्ष्य दुश्मन के एयर डिफेंस को निष्क्रिय करना होता है।
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भारत ने सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT) और इलेक्ट्रॉनिक इंटेर्सेक्शन के जरिए HQ-9 राडारों के फ्रीक्वेंसी पैटर्न जाने होंगे, जिससे S-400 के इंटरसेप्शन कुंडल को अनएवेडेबल बनाया गया (Indian Defence Research Wing)।
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ड्रोन-आधारित राडार डेकोय और ई-वाई वारफेयर प्लैटफॉर्म्स से दुश्मन की राडार सीमा को छेड़ा गया, जिसके परिणामस्वरूप एयर डिफेंस गायब या अकार्यक्षम हो गया।
रणनीतिक महत्व और भविष्य के परिदृश्य
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S-400 की तैनाती से भारत को 400 किमी तक की “एयरडोमिनेंस” मिली है, जिससे दुश्मन के गहरे एयरस्पेस में भी कार्रवाई संभव हुई (Indian Defence Research Wing)।
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पाकिस्तान के पास HQ-9 के अलावा Spada और LY-80 जैसी प्रणाली हैं, पर वे S-400 को काउंटर करने में अपर्याप्त मानी जाती हैं (The Times of India)।
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भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, AI-सक्षम ड्रोन और लघु-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (SHORAD) की भूमिका बढ़ेगी।
निष्कर्ष
ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की “ऑल-डोमेन” युद्ध क्षमता और सटीकता का प्रदर्शन किया है। S-400 त्रयुम्फ ने पाकिस्तान के HQ-9 को अप्रभावी कर अमेरिकी और रूसी प्रणालियों के बीच संतुलन को बदल दिया है। पाकिस्तान को अब अपनी वायु रक्षा रणनीति में गहन सुधार करना होगा, जबकि भारत रॉकेट व इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में आगे के अवसर तलाश सकता है।













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