लेखक: ग्लोबल अपडेट्स टीम
प्रकाशन तिथि: 5 मई 2025
दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच पाकिस्तान और तुर्की की सैन्य साझेदारी ने नई हलचल पैदा कर दी है। तुर्की का उन्नत तकनीक से लैस नौसेना जहाज TCG Büyükada हाल ही में पाकिस्तान की समुद्री सीमा में पहुंचा, जिसे ‘गुडविल विज़िट’ बताया गया, लेकिन इसके पीछे के सैन्य और राजनीतिक संकेत कहीं अधिक गंभीर हैं।
भारत की निर्णायक रणनीति और पाकिस्तान की घबराहट
पिछले कुछ समय से भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनातनी चरम पर है। भारत के प्रधानमंत्री द्वारा तीनों सेनाओं को स्वतंत्र कार्रवाई की छूट दिए जाने के बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई। भारतीय प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सेना समय, स्थान और रणनीति खुद तय करेगी।
यह बयान पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी जैसा था। इसने इसे गंभीरता से लिया और तुर्की समेत अन्य मित्र देशों से सैन्य सहयोग मांगना शुरू कर दिया।
तुर्की की भूमिका: केवल दोस्ती या रणनीतिक साझेदारी?
तुर्की, जो हाल के वर्षों में पाकिस्तान के साथ धार्मिक और सामरिक आधार पर नज़दीक आया है, अब खुलकर उसके साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। यह पहली बार नहीं है कि दोनों देशों ने एक-दूसरे का सैन्य रूप से समर्थन किया हो, लेकिन इस बार मामला अधिक संवेदनशील है।
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TCG Büyükada, तुर्की की एडवांस्ड MILGEM क्लास का युद्धपोत है, जो एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, एयर डिफेंस और सतह से सतह तक मिसाइलों से लैस है।
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पाकिस्तान की नौसेना, जो 1971 के कराची पोर्ट हमले के बाद से कमजोर मानी जाती रही है, तुर्की के ज़रिए अपनी सामुद्रिक क्षमता को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
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तुर्की के एयरफोर्स प्रमुख और आर्मी अधिकारियों की पाकिस्तान यात्रा भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जो दोनों देशों के बीच पूर्ण सैन्य साझेदारी को दर्शाती है।
तटीय सुरक्षा: क्या भारत पर समुद्र के रास्ते से भी खतरा?
पाकिस्तान की अरब सागर से लगी कोस्टलाइन उसकी रणनीतिक कमजोरी रही है। भारत की पश्चिमी नौसेना कमांड इसकी लगातार निगरानी करती रही है। 1971 में भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट और ऑपरेशन पाइथन के तहत कराची बंदरगाह को भारी नुकसान पहुंचाया था।
अब तुर्की की नेवी द्वारा पाकिस्तान के तटीय इलाकों में प्रशिक्षण और सर्वेक्षण यह संकेत देता है कि पाकिस्तान अपनी उस पुरानी कमजोरी को दूर करना चाहता है।
क्या भारत कर सकता है जवाबी हमला?
भारतीय रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत यदि सैन्य कार्रवाई करता है तो वह संभवतः पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) या सीजफायर लाइन से करेगा। ऐसी भी संभावना है कि भारत इस बार पारंपरिक युद्ध की बजाय हाईब्रीड वॉरफेयर – यानी साइबर, नौसेना ब्लॉकेड, और सीमित स्ट्राइक जैसी रणनीतियों का उपयोग करे।
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भारतीय नौसेना ने हाल ही में INS Vikrant और INS Visakhapatnam जैसे अत्याधुनिक पोतों को शामिल किया है।
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भारत अब IOR (Indian Ocean Region) में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है ताकि पाकिस्तान और उसके सहयोगियों की गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जा सके।
सामरिक संकेत: क्या यह एक नए ‘इस्लामिक मिलिट्री अलायंस’ की शुरुआत है?
तुर्की का पाकिस्तान को समर्थन देना केवल द्विपक्षीय सहयोग नहीं, बल्कि एक बड़े इस्लामिक मिलिट्री ब्लॉक की शुरुआत मानी जा सकती है। तुर्की, पाकिस्तान और कुछ हद तक मलेशिया जैसे देश इस्लामी दुनिया में एक नए ध्रुव के रूप में उभरने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे राष्ट्रों की सुरक्षा पर पड़ेगा।
भारत को सतर्क रहना होगा
भारत को इस समय अपने पारंपरिक सहयोगियों जैसे फ्रांस, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ अपनी सैन्य रणनीतियों को और अधिक मज़बूत करना होगा। विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा, सैटेलाइट इंटेलिजेंस और साइबर डिफेंस के क्षेत्र में।
तुर्की-पाकिस्तान की यह बढ़ती नजदीकी भारत के लिए एक रणनीतिक चुनौती बनकर उभर रही है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।













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