सुनीता विलियम्स पृथ्वी पर लौटीं: 10 महीने का अंतरिक्ष मिशन सफलतापूर्वक समाप्त

नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बैरी “बुच” विलमोर 10 महीने लंबे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) मिशन के बाद सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आए हैं। यह मिशन मूल रूप से सात दिन का था, लेकिन बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण इसे बढ़ाना पड़ादोनों अंतरिक्ष यात्री स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन कैप्सूल के जरिए फ्लोरिडा के तट पर सुरक्षित लैंडिंग में सफल रहे। नासा ने अनुकूल मौसम स्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनकी वापसी का कार्यक्रम जल्दी तय किया। इस टीम में एक अन्य अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और एक रूसी अंतरिक्ष यात्री भी शामिल थे, जिन्होंने ISS के संचालन को सुचारू बनाए रखा।
लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने का स्वास्थ्य पर असर
गुरुत्वाकर्षण रहित वातावरण में लंबे समय तक रहने से मानव शरीर को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सुनीता विलियम्स और उनकी टीम को मांसपेशियों के कमजोर पड़ने और हड्डियों की घनत्व में कमी जैसी समस्याओं के लिए व्यापक पुनर्वास से गुजरना पड़ेगा। नासा ने उनकी ताकत और शारीरिक क्षमता को फिर से हासिल करने के लिए एक कड़ी भौतिक चिकित्सा और व्यायाम योजना तैयार की है।
क्या यह एक रिकॉर्ड-ब्रेकिंग मिशन है?
हालांकि उनका मिशन अपेक्षित समय से अधिक लंबा था, यह अमेरिका के सबसे लंबे अंतरिक्ष प्रवास का रिकॉर्ड नहीं तोड़ सका, जो फ्रैंक रुबियो ने 371 दिनों के साथ बनाया था। फिर भी, उनकी सहनशक्ति और लचीलापन की व्यापक प्रशंसा की गई है, जो नासा के अंतरिक्ष यात्रियों की प्रतिबद्धता और विशेषज्ञता को दर्शाता है।
यह मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण की जटिलता और अप्रत्याशित चुनौतियों को दर्शाता है। सुनीता विलियम्स की वापसी मानवता की अंतरिक्ष अन्वेषण की यात्रा में एक और मील का पत्थर साबित होती है।
सुनीता विलियम्स पृथ्वी पर कब लोटी ?
सुनीता विलियम्स और उनके साथी बैरी विलमोर 16 मार्च 2025 को स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन कैप्सूल के माध्यम से पृथ्वी पर लौट चुके हैं। यह मिशन मूल रूप से 10 दिनों का था, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण इसे लगभग 10 महीने तक बढ़ाना पड़ा.
सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष मे क्यों ओर कब गई थी?

सुनीता विलियम्स ने 5 जून 2024 को अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी थी। यह मिशन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर अनुसंधान और प्रयोगों के लिए था। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यान की क्षमता को परखना था, जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों को ISS तक ले जाना और वापस लाना शामिल था।
हालांकि, तकनीकी समस्याओं के कारण उनकी वापसी में देरी हुई, और यह मिशन 10 दिनों के बजाय लगभग 9 महीने लंबा हो गया। इस दौरान, उन्होंने ISS पर कई महत्वपूर्ण प्रयोग और रखरखाव कार्य किए।
सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष से समय पर क्यों नहीं आ पाई थी?
सुनीता विलियम्स और उनके साथी अंतरिक्ष से समय पर वापस नहीं लौट पाए क्योंकि उनके मिशन में इस्तेमाल किए गए बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में तकनीकी समस्याएं आ गई थीं। इस यान के थ्रस्टर में खराबी और हीलियम गैस का रिसाव होने के कारण इसे सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना संभव नहीं था2।
नासा ने इन समस्याओं को हल करने के लिए व्यापक परीक्षण किए और अंततः स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन कैप्सूल का उपयोग करके उन्हें वापस लाने का निर्णय लिया। यह प्रक्रिया लंबी और जटिल थी, लेकिन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया3।
कौन है सुनीता विलियम्स

सुनीता विलियम्स एक भारतीय-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और अमेरिकी नौसेना अधिकारी हैं। उनका जन्म 19 सितंबर 1965 को ओहायो, अमेरिका में हुआ था। वह भारतीय मूल की दूसरी महिला हैं जिन्होंने नासा के माध्यम से अंतरिक्ष में कदम रखा। सुनीता ने अंतरिक्ष में कुल 321 दिन बिताए हैं और उन्होंने 7 बार स्पेसवॉक किया है, जो एक महिला के लिए एक रिकॉर्ड है।
उन्होंने 1987 में संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना अकादमी से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की। सुनीता ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन पूरे किए हैं, जिनमें एसटीएस-116, अभियान 14 और अभियान 15 शामिल हैं।
उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें भारत सरकार द्वारा दिया गया पद्म भूषण (2008) भी शामिल है। सुनीता विलियम्स आज भी अंतरिक्ष अनुसंधान और विज्ञान के क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।













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